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सुस्‍वागतम

शनिवार, 28 अप्रैल 2012

मोबाइल

घनश्याम नाथ कच्छावा की नव कृति जीवन रा चितराम की एक बानगी मोबाइल
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जीवण
जियां-
मोबाइल रो सैट
अर
सिम इणरी आतमा
सांसां स्यूं रिचार्ज
हुवे आ काया
मोबाइल सैट-सी
बणी
इण मिनखाजूण स्यूं
मिनखपणे री रिंगटोन
गायब हुयगी
अबै
जीवण रो मोबाइल
खाली सांसां रो
खोळीयों हुय'र
बिना चेतना रै पाण
वायबरेशन रै माथै इज
पड़यो हैं |

रविवार, 8 अप्रैल 2012

राजस्थानी भाषा को मिले मान्यता
यह कैसी विडम्बना है की हमारी अपनी मायड. भाषा को हमारी ही सरकार मान्यता नहीं दे रही हैं | पता नहीं सरकार या हमारी सबसे बड़ी पंचायत में प्रतिनिधित्व कर रहे नेताओं के सामने ऐसी क्या समस्या है की वे राजस्थानी भाषा की मान्यता के मसले पर मुखरित नहीं हो रहे हैं | साधुवाद के पात्र हैं हमारे बीकानेर के सांसद श्री अर्जुन राम जी मेघवाल जिन्होंने राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के लिए संसद में राजस्थान की आवाज बुलंद की | राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए केवल यही नही बल्कि राजस्थानी भाषा को मान्यता देनी होगी | अब यदि सरकार ने इस और ध्यान नहीं दिया तो उसे राजस्थान की जनता के कोप का सामना करना पड़ेगा |
narendra sharma 

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