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सुस्‍वागतम

रविवार, 11 दिसंबर 2011

लोकपाल पर बहस नहीं करना पलायन के समान

अन्ना की ओर से जनलोकपाल बिल पर बहस के लिए सभी राजनेतिक पार्टियों को न्योता दिए जाने का देश स्वागत करता है लेकिन कांग्रेस ने बहस से किनारा कर पलायन कर लिया जो पलायन के  समान है। देश के इस ज्वलंत मुद्ये पर कांग्रेस अपना पक्ष रख सकती थी लेकिन इस पार्टी ने बहस में भाग नहीं लेकर भारतवासियों को निराश किया है। कांग्रेस को कम से कम लोकपाल का किस तरह का मसौदा ब्रीफ किया है की जानकारी तो देश को देनी ही चाहिए थी। कांग्रेस के नेता कम से कम इतना तो जनते ही है की किसी भी विवाद का समाधान संवाद के बिना नहीं हो सकता। अन्ना की ओर से जनलोकपाल अन्ना के लिए नहीं देश के खातिर है। कांग्रेस के नेताओं को इस पर आत्म मंथन करना चाहिए।
नरेन्द्र शर्मा 

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

व्यापार नहीं बनें पत्रकारिता

 पत्रकारिता एक मिशन है लेकिन अब  पत्रकारिता व्यापार में बदलती जा रही  है। हालाँकि सभी क्षेत्र में बदलाव आया है। फिर भी  पत्रकारिता से देश काफी उम्मीद रखता है। इसलिए पत्रकारिता के  क्षेत्र में काम करने वालों को चाहिए की वे इस पर आत्म मंथन करें। माना अर्थ युग में पत्रकारिता करना एक चुनौती है लेकिन पैसा ही सबकुछ नहीं है। सच  यह भी है आज ऊँचे मीडिया  संस्थानों में पत्रकार स्वतंत्र नहीं है। पत्रकार की हेसियत एक नौकर की है। इसलिए अपने परिवार का पेट पालने के खातिर वह मजबूरी में बहुत सी बातों की अनदेखी करता है लेकिन यह मजबूरी आने वाले कल पर  भारी पर सकती है। संस्थानों की नीति के साथ कदमताल करता पत्रकार अपने उस दाइत्व से भटक रहा है जिसके लिए वह इस क्षेत्र में आया था । सीधे शब्दों में बात नहीं कर एक संकेत दे रहा हूँ मेरे पत्रकार साथी इस पर आत्मावलोकन करें।

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